क्या अंतिम दौर की लड़ाई लड़ रहे कमलनाथ ..?

जल्द ही मध्यप्रदेश में 24 विधान सभा सीटो पर उप चुनाव होना है इस को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल ऐड़ी चोटी का दम लगा रही है यह चुनाव तय करेगा की भविष्य में किस दल की सरकार प्रदेश में रहेगी ! यह चुनाव कमलनाथ ,ज्योतारादित्य सिंधिया के कद को तो तय करेगा ही साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों की प्रतिष्ठा को प्रतिष्ठापित भी करने बाला होगा !

बीते दिनों की बात करी तो विधानसभा चुनाव 2018 में मुख्यमंत्री भले ही कमलनाथ को बनाया गया लेकिन सिंधिया ने अपनी ताकत का एहसास डेढ़ साल बाद करा दिया. यानी ज्योतिरादित्य का कांग्रेस छोड़ना सिर्फ कमलनाथ कांग्रेस के तख्तापलट का कारण नहीं बना बल्कि कांग्रेस को भी बड़ा झटका लगा. अब कांग्रेस को कमलनाथ के नेतृत्व में ही सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्र में उनके समर्थकों को चुनाव हराना है, जो भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. हालांकि, कमलनाथ दावा कर रहे हैं कि वो उपचुनाव में 24 में से 20 सीटें जीतने में कामयाब रहेंगे.

मध्य प्रदेश में होने वाले उपचुनावों के लिए प्रत्याशियों के नाम भी नहीं तय हो पा रहे हैं. अपने-अपने खेमे के नेताओं को टिकट दिलाने की खींचतान चल रही है. इन्हीं के बीच एक मुद्दा बन रहा है कि कांग्रेस छोड़कर बीजेपी गए नेताओं की घर वापसी कराई. इनमें दो नाम काफी चर्चा में हैं- चौधरी राकेश चतुर्वेदी और पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू का. राकेश को भिंड की मेहगांव सीट से उतारना चाहता है तो प्रेम गुड्डू को मंत्री तुलसीराम सिलावट के खिलाफ. पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह इस पर राजी नहीं है वो आपत्ति दर्ज करा कर निष्ठावान कार्यकर्ताओं को आगे लाने की बात सोशल मीडिया के जरिए उठा चुके हैं. ऐसे में उपचुनाव के प्रत्याशी के चयन पर खेमेबाजी जारी है.

अंदरूनी खाने से जानकारी आ रही है की प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिज्विज्य सिंह अपने बेटे के भविष्य को लेकर राजपूत राजघरानो को साधने में लगे हुए है वे सीधे तौर पर सामने नही आ रहे है बल्कि हथियार के तौर पर अजय सिह (राहुल सिंह ) को हथियार के तौर पर पेश कर राजनितिक बिसात बिछा रहे है !  जानकर बताते है की इसकी भनक कमलनाथ को हो गई है और बे अब गंभीर मामलो में सीधे तौर पर दिग्विजय सिहं से दूरिया बनाने का प्रयास कर रहे है , कमलनाथ की मजबूरी है की वे आगामी उपचुनाव तक अन्दुरुनी गुटबाजी को उभरने ना दे,नही तो इसका दुषप्रभाव उपचुनाव पर पडेगा ! इससे कांग्रेस के हाथो आती दिख रही सत्ता से हाथ धोना पड सकता है ?

जानकार बताते है की कमलनाथ के राजनैतिक जीवन की यह अंतिम लड़ाई है क्योंकि मौजूदा दौर में जिस तरह की राजनीति चल रही है उस तासीर की राजनीति में कमलनाथ अनाडी खिलाड़ी साबित हुए है ! कमलनाथ अपने चालीस से अधिक बर्षो की राजनितिक जीवन के अंतिम पड़ाव पर चल रहे है जानकार बताते है की बे अन्दर से टूट चुके है उनका मानना है की राष्ट्रीय राजनीती से प्रदेश की राजनीति में आना उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई है , राजनीति में जिस तरह का कद कमलनाथ का रहा है उससे वे पायदान पर आ गए है ! उनकी लोकप्रियता इस कदर कम हो गई है की जिस छिन्दवाडा को अपना जीवन समर्पित करने बाले इस योद्धा के गुमसुदगी के पोस्टर चस्पा हो रहे है इससे इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है ?

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